गोरखपुर की धरोहर गोरखनाथ मंदिर पर प्रदूषण का साया

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मंदिर की दो किलोमीटर की परिधि में हो रहा औद्योगिक इकाइयों का संचालन, जिम्मेदार विभाग नहीं दे रहा ध्यान

गोरखपुर : शहर के ऐतिहासिक धरोहर गोरखनाथ मंदिर पर प्रदूषण का साया छाया हुआ है। मंदिर से 2 किलोमीटर की परिधि के भीतर कई औद्योगिक इकाइयों का संचालन हो रहा है। रिहायशी क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों के संचालन से न सिर्फ आम आदमी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि इनकी चिमनियों से निकलने वाले धुएं और राख से मंदिर का सफेद संगमरमर भी पड़ हो रहा है। वर्तमान समय में यह मंदिर सुबह के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निवास भी है। वह यहां के पीठाधीश्वर हैं। इसके बावजूद प्रदूषण विभाग और स्थानीय प्रशासन के लोग समस्या को लेकर संजीदा नहीं हैं।

बरगदवा के विकास नगर क्षेत्र निवासी सॉफ्टवेयर कारोबारी राहुल मिश्र ने मामले की शिकायत प्रदूषण नियंत्रण विभाग सहित अन्य अधिकारियों से की है। इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए शिकायती पत्र में उन्होंने कहा है कि गोरखनाथ मंदिर से दो किलोमीटर उत्तर स्थित बरगदवा औद्योगिक क्षेत्र में बीएन डायर कपड़े की फैक्ट्री तथा अन्य औद्योगिक इकाइयां बॉयलर चलाने हेतु भूसी का प्रयोग करके अपने चिमनी से भारी मात्रा में कार्बन की राख उगल रही हैं। इससे विकास नगर कॉलोनी, विस्तार नगर कॉलोनी, बरगदवा गांव और गोरखनाथ मंदिर बुरी तरह कार्बन डस्ट से प्रभावित हो रहे हैं। इसके कारण मनुष्य अपने सांस में प्रतिदिन 20 ग्राम कार्बन अपने फेफड़े में ले रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि श्री गोरक्षनाथ मंदिर के संगमरमर को इन औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं और राख प्रदूषित कर काला कर रही है। इसके अतिरिक्त मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के आंख में कारबन डस्ट पड़ जाने के कारण तथा सांस में कार्बन ले लेने के कारण काफी समस्या हो रही है। संबंधित जिम्मेदार लोगों से कई बार शिकायत की गई परंतु कोई कार्यवाही नहीं हुई।
बड़े आश्चर्य व अचंभे की बात है की माननीय मुख्यमंत्री का निवास स्थल श्री गुरु गोरखनाथ मंदिर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारीगण व मंत्रीगण प्रदूषण के नियमों का माखौल उड़ा रहे हैं। जब माननीय मुख्यमंत्री जी का निवास स्थल मंदिर गोरखनाथ प्रदूषण से सुरक्षित नहीं रहेगा तो प्रदेश में अन्य जगह प्रदूषण से सुरक्षित कैसे रहेंगे। प्रदूषण नियंत्रण का प्रचार प्रसार पर्यावरण मंत्रालय लगातार करता रहता है परंतु जहां प्रदूषण के संबंध में कोई कार्यवाही करनी रहती है वहां संबंधित जिम्मेदार अधिकारी क्यों आंख मूंद लेते हैं, यह कहना कठिन है।

राहुल मिश्र ने अधिकारियों का ध्यान ताजमहल को प्रदूषण से बचाने की व्यवस्था की तरफ आकृष्ट कराया। कहा, जब ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए इतनी व्यवस्था की जा सकती है तो श्री गोरखनाथ मंदिर को प्रदूषण से बचाने के लिए कुछ क्यों नहीं किया जा सकता है। उन्होंने प्रदूषण विभाग से निवेदन किया है कि कम से कम मंदिर को प्रदूषण से बचाने के लिए कार्रवाई करे।

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