छात्र के ट्वीट पर 5000 का जुर्माना माफ करके इंटरनेट मीडिया की सुर्खियों में इटावा के एसपी आकाश तोमर

Reading Time: 2 minutes
आईपीएस आकाश तोमर

इटावा के एसएसपी आकाश तोमर शुक्रवार को इंटरनेट मीडिया की सुर्खियों में आ गए। उन्होंने एक छात्र के ट्वीट का संज्ञान लेते हुए उसकी बाइक का चालान होने पर लगाया गया पांच हजार रुपये का जुर्माना माफ कर दिया।
इटावा-फर्रुखाबाद मार्ग पर स्थित ग्राम हरिहरपुरा के एमए प्रथम वर्ष का छात्र दीपेंद्र यादव 10 फरवरी की शाम को कोचिंग से घर लौट रहा था। पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान उसकी बाइक के नंबर प्लेट पर एक नंबर हटा देखकर चालान काटते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। उसी रात दीपेंद्र ने एसएसपी आकाश तोमर को ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘वह अपनी गलती स्वीकार करता है, लेकिन इतने पैसे देने में असमर्थ है। घर की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। कृपया मदद करें। आपको बहुत से लोगों की मदद करते सुना और देखा है।’ इस पर एसएसपी ने मामले की जांच का भरोसा दिया।

शुक्रवार शाम को एसएसपी ने खुद दीपेंद्र को ट्वीट करके बताया कि उनका चालान निरस्त कर दिया गया है। शुभकामनाएं। एसएसपी ने बताया कि छात्र के ट्वीट की जांच कराई गई। इसके बाद उसके चालान को माफ करने का फैसला लिया गया। उसे अच्छी पढ़ाई करने की सलाह भी दी है।

आईपीएस आकाश तोमर

सिविल सेवा की तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्रों को दिए थे नोट्स

आईपीएस आकाश तोमर

दो माह पूर्व भी एसएसपी आकाश तोमर छात्रोंं को लेकर अपने व्यवहार सेे सुर्खियों मैं आए थे। सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को गूगल ड्राइव में नोट्स देने के साथ उन्होंने विद्यार्थियों को सिविल सेवा की तैयारी के टिप्स भी दिए थे। इंटरनेट मीडिया पर विद्यार्थियों के बीच वह खासे लोकप्रिय हैैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Releated

साहित्य में समाहित है संपूर्ण समाज का अक्स : दिलीप पांडेय

दिल्ली के तिमारपुर से विधायक साहित्यकार दिलीप पांडेय सह लेखिका चंचल शर्मा के साथ राष्ट्रीय पुस्तक मेला मंच से “उपन्यास से बाल कथा लेखन तक का सफर” पर की चर्चा स्त्री विमर्श एवं बाल कथा लेखन मौजूदा दौर की जरूरत : चंचल शर्मा लखनऊ : साहित्य सर्जना के नवांकुरों के लिए मंगलवार की शाम तब […]

(बात बीते कल की) बाबा ने मेरे लिए यह घड़ी…

बाबा ने मेरे लिए यह घड़ी खरीद दी थी लगभग साढ़े तीन दशक पहले. भला तब घड़ी की क्या जरूरत थी! अब मेरे ही पुत्र के उठने का कोई टाइम नहीं है. लेकिन तब एक सुबह उठकर मैं सीढ़ियों पर बैठे ऊंघ रहा था कि पीटीआई योगेन्द्र सिंह किसी काम से आ गए. कुछ खुढ़ुर-बुढ़ुर […]

error: Content is protected !!
Designed and Developed by CodesGesture