दीजिए आत्मरक्षा के मंत्र

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शस्त्र-शास्त्र में साम्य के सुंदर स्वरूप नाथ योगी प्रणाम्य हैं। बाबा गुरु गोरखनाथ की अद्भुत छवि का अहसास श्रद्धा में बदल जाता है। जब यही श्रद्धा सत्ता के साथ हो तो फिर राम राज। गजब की बात है रामराज की बात करने वालों के पास योगी हैं। महंत सीएम बनने के साथ रामराज की ओर अग्रसर हैं, मगर अपराधी श्रद्धा-सत्ता का संतुलन नहीं बनने दे रहे हैं। सरकार और पुलिस इच्छाशक्ति दिखाते हुए दुर्दांत अपराधियों को जहन्नुम पहुंचा रही है, लेकिन हालात इससे भी नहीं संभल रहे हैं।
क्या जघन्य वारदात होने के बाद अपराधी के एनकाउंटर की जगह अपराध को पहले ही नहीं रोका जा सकता है? जवाब है बहुत हद तक हां। बस लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का साथ आत्मरक्षा के लिए भी तैयार करना होगा। बेरोजगारी दूर होगी तो अपराध की ओर बहकने वाले कम होंगे। बेटियां मनचलों को धुलने में नहीं झिझकेंगी तो उनके खिलाफ अपराधों में कमी आएगी। लोग अपनी सुरक्षा में सक्षम होंगे तो दुस्साहस दिखाते हुए कुछ अपराधी जनता की गोली का शिकार बनेंगे। ऐसे बहादुरों को सम्मान मिलेगा तो समाज में अभय का माहौल बनेगा।
विडंबना है कि सरकार डिफेंस कॉरिडोर बनाने जा रही है, आम आदमी को आत्मरक्षा के लिए शस्त्र उपलब्ध कराने की दिशा में उसका ध्यान नहीं है। अफसर लाइसेंस देने में कसमसा रहे हैं। प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस को लेकर एक तरह की अघोषित रोक से लगी हुई है। पूर्व में कोर्ट की रोक का हवाला दिया जाता था, जिसे हटे काफी अरसा हो गया। मुख्यमंत्री की ओर से भी ऐसी 2018 में ही हटाई जा चुकी है। इसके बाद भी एक डर कायम है। इस डर का कारण शायद मुख्यमंत्री योगी का खौफ है। कभी कृपा स्वरूप तो कभी लक्ष्मी की कृपा मानकर लाइसेंस जारी किए गए। ऐसी ही विसंगतियों को लेकर पूर्व में सख्ती लागू की गई थी। सख्ती के बीच फर्जी लाइसेंस पर असलहों की खरीद-फरोख्त के मामले पकड़े गए। मुख्यमंत्री का हंटर चला, मगर घुना सिस्टम सुधरा नहीं बल्कि सहम गया है।
एक मेरे परिचित हैं। बड़े पत्रकार हैं। उनका सात सौ रुपया, मोबाइल फोन और जैकेट लुटा, तो हाईवे पर लोगों को देर रात शिकार बनाने वाला गिरोह पकड़ा गया। उनके एक शुभेच्छु ने आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस लेने का सुझाव दिया। अपराध पीड़ित के लिए कभी भी लाइसेंस जारी करने पर रोक नहीं थी। साइकिल वाले भैया की सरकार में ही उन्होंने आवेदन कर दिया। बिना किसी सोर्स-सिफारिश के वो अब तक लाइसेंस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वह तो बस एक नजीर हैं। ऐसे न जाने कितने जरूरतमंद होंगे, जो चाहते होंगे कि नाथ योगी को शस्त्र की दीक्षा याद आ जाए और वह आत्मरक्षा के मंत्र के रूप में परिभाषित हो। सिस्टम को सुधार कर ऐसे आवेदन प्राथमिकता पर निपटाया जाएं, जिससे योग्य और पात्र शस्त्र के हकदार हों। शस्त्र-शास्त्र के साथ ही श्रद्धा-सत्ता का साम्य स्थापित हो सकता है। रामराज चाहिए तो रावण वध के लिए हर एक को राम बनना होगा, अकेली है पुलिस का काम नहीं है।

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