सुस्त चाल ने छीनी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी

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देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आखिरकार मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। उनकी विदाई क्यों हुई? आखिर बीजेपी को अचानक ऐसा क्यों लगने लगा है कि उनके चेहरे पर अगले साल होने वाला चुनाव लड़ना पार्टी को डुबो सकता है?
उत्तराखंड की सियासी फिजाओं में तैर रहे इन सवालों के जवाब दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय के गलियारों में ढूंढे जा रहे हैं। हालांकि, जवाब पहाड़ी राज्य में ही मौजूद हैं। आप थोड़ा टटोलना शुरू करेंगे, तो एक-एक कर इसका जवाब मिलता चला जाएगा। लोग मोदी और भाजपा से संतुष्ट थे लेकिन सीएम के प्रति उनके विचार सकारात्मक नहीं थे। बताया जाता है कि पार्टी ने इसके लिए एक सर्वे भी कराया था।
एक साल में कौन कर पाएगा बेड़ापार?
चुनाव से करीब-करीब एक साल पहले बीजेपी, राज्य में चेहरा बदलने के लिए जिस तरह से आतुरता दिखाई उससे लगता है कि देर-सवेर सही, लेकिन उसने इसे भांप लिया। अब बड़ा सवाल यह रहेगा कि बीजेपी अगर अपने पत्ते फेंट भी लेती है, तो इतने कम समय में क्या वह डैमेज कंट्रोल कर पाएगी? आखिरी बीजेपी के पास वह कौन सा करिश्माई बल्लेबाज है, जो सियासी पिच पर आखिर गेंद पर छक्का जड़ देगा?

योगी के काम से हो रही थी तुलना
18 मार्च, 2017 में बीजेपी ने यूपी और उत्तराखंड में प्रचंड जीत की होली खेली थी। 70 में से 57 सीटों की भारी जीत और उम्मीदों के साथ रावत ने कुर्सी संभाली थी। संयोग की बात थी कि उसके ही अगले दिन यूपी में उन योगी आदित्यनाथ ने भी में सीएम की कुर्सी संभाली, जो उनके ही गृह जनपद पौड़ी से आते हैं।

प्रदेश भले ही अलग थे, लेकिन पहले ही दिन से रावत और योगी के काम की तुलना होती रही और हो रही है। रावत पर निष्क्रिय सीएम का ठप्पा लगाने का एक काम यूपी में योगी की तेजी ने भी किया। गाहे-बगाहे यूपी में योगी की सख्त छवि और हर अच्छे काम की तुलना त्रिवेंद्र सिंह रावत से होती रही और वह अपनी अलग ही छवि में कैद होते रहे।

गैरसैंण कमिश्नरी का ऐलान बगावत को अंजाम तक पहुंचा गया : पिछले चार सालों में कई काम रावत की छवि को गढ़ते चले गए, लेकिन हाल ही में गैरसैंण कमिश्नरी का ऐलान, जो उनका आखिरी फैसला रहा, उनके कैबिनेट सहयोगियों को भी बगावत की हद तक नाराज कर गया। देहरादून के सियासी हलकों के चर्चा है कि चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर को लेकर अलग कमिश्नरी के फैसले की खबर खुद उनके कैबिनेट सहयोगियों तक को नहीं थी।

सीएम की रेस में ये नाम आगे

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री की रेस में राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, नैनीताल से लोकसभा सांसद अजय भट्ट और धन सिंह रावत का नाम आगे है। तीनों में से किसी एक को नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, सतपाल महाराज ने इस सिलसिले में संघ के प्रमुख नेताओं से मुलाकात भी की थी। कहा जा रहा है कि नए सीएम के लिए सतपाल महाराज के नाम पर भी चर्चा चल रही है।

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