‘चाणक्य’ बदलेंगे सूबे की सत्ता…रायबरेली में गरजे ‘बाबा’

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  • दिल्ली वाली दीदी और अमेठी वाली दीदी की सियासी मोर्चे बंदी के बीच जिले में हुए ब्राह्मण सम्मान समारोह के निकाले जा रहे निहितार्थ

लखनऊ : सियासी गलियारों में वीवीआईपी क्षेत्र के रूप में पहचानी जाने वाली रायबरेली का राजनीतिक पारा इन दिनों बढ़ गया है। जिला विकास एवं अनुश्रवण समिति का अध्यक्ष बनाकर केंद्र सरकार ने भगवा खेमे के लिए मोर्चाबंदी करने की खातिर अमेठी की दीदी के लिए दरवाजे खोल दिए हैं, तो वहीं दिल्ली वाली दीदी पंजे को नई ताकत देने के लिए कांग्रेस के इस अभेद्य दुर्ग से ही अभियान छेड़ना चाहती हैं। इस सबके बीच शुक्रवार को यहां गोरखपुर वाले बाबा के कुनबे के एक माननीय की उपस्थिति ने एक नई सियासी हलचल पैदा कर दी है। शुक्रवार को रायबरेली के शोरा गंगागंज में ‘बाबा’ ब्राह्मण सम्मान समारोह में गरजे तो राजनीतिक रूप से उपेक्षित ब्राह्मणों के भीतर सोए ‘चाणक्य’ को जगा गए।

वैसे तो यह कार्यक्रम अराजनैतिक था, लेकिन पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के पुत्र गोरखपुर के चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से विधायक विनय शंकर तिवारी की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक मायने दे दिए। मुख्य अतिथि के रूप में विनय शंकर तिवारी ने विप्र स्वाभिमान एवं सम्मान के लिए हर लड़ाई का नेतृत्व करने का वचन दिया। जय श्री परशुराम का उद्घोष करके ब्राह्मणों को उनका बल याद दिलाया। कहा कि ब्राह्मण कभी सत्ता का भूखा नहीं रहा। ब्राह्मणों पर मौजूदा सरकार में हुए अत्याचार और उनके उत्पीड़न के मामले उठाते हुए विनय शंकर तिवारी ने स्वजातीय बंधुओं के भीतर सोए चाणक्य को जगाया। बोले- ‘चाणक्य’ बनकर हम सब सूबे की सत्ता बदलेंगे।

विनय शंकर तिवारी की एक कार्यक्रम के दौरान तस्वीर : फाइल फोटो

उठा ब्राह्मण एका का संदेश : इस आयोजन के बाद से राजनीतिक हलकों में इसके निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां हर राजनीतिक दल की नजर रहती है। ऐसे में यहां यह आयोजन सत्ता और विपक्ष को ब्राह्मणों की राजनीतिक ताकत का एहसास कराने का एक प्रयास भी माना जा सकता है। फिलहाल यहां से उठा ब्राह्मण एका का संदेश सूबे की सियासत में क्या गुल खिलाएगा यह तो 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही सामने आएगा।

पूरे प्रदेश में है कुनबे का प्रभाव : विनय शंकर तिवारी के पिता पूर्व काबीना मंत्री हरिशंकर तिवारी अपने दौर के बाहुबली ब्राह्मण नेता के रूप में जाने जाते हैं। उनके जेष्ठ पुत्र भीष्म शंकर तिवारी संत कबीर नगर से सांसद रहे हैं, तो वहीं इसी परिवार से जुड़े एमएलसी गणेश शंकर पांडेय उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रह चुके हैं। इससे सहज ही समझा जा सकता है कि गोरखपुर के इस परिवार का पूरे प्रदेश में प्रभाव है।

2017 में अपने आवास पर छापा के बाद कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे हरिशंकर तिवारी : फाइल फोटो

ब्राह्मणों को एकजुट करने की ताकत : 2017 में जब यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार नई नई बनी थी, तब गोरखपुर पुलिस ने विनय शंकर तिवारी के घर पर छापामारी की थी। उस समय पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी विरोध में कलेक्ट्रेट परिषद पहुंच कर धरने पर बैठ गए थे। उस समय दलीय सीमा से परे हटकर बहुत से ब्राह्मण नेता वहां जुटे थे। स्वयं बसपा से जुड़े गणेश शंकर पांडेय और विनय शंकर तिवारी हाल ही में पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देने वरिष्ठ भाजपा नेता रमापति राम त्रिपाठी के घर देवरिया पहुंचे थे।

ब्लॉक प्रमुख चुनाव में इनके आगे सत्ता की नहीं चली : ब्लॉक प्रमुख चुनाव में जहां जगह-जगह विपक्ष के कद्दावर नेताओं को सत्ता के सामने निराशा हाथ लगी, वहीं विनय शंकर तिवारी और गणेश शंकर पांडेय अपने प्रत्याशियों को जिताने में कामयाब रहे। विनय शंकर तिवारी ने अपने क्षेत्र में भूमिहार चेहरे पर दांव लगाया था, तो वहीं गणेश शंकर पांडे ने महाराजगंज के लक्ष्मीपुर ब्लॉक से अपनी पुत्रवधू को उम्मीदवार बनाया था।

3 thoughts on “‘चाणक्य’ बदलेंगे सूबे की सत्ता…रायबरेली में गरजे ‘बाबा’

  1. बेचारे चाणक्य आज अगर ऊपर से देख रहे होंगे तो क्या सोचते होंगे की कैसे कैसे लोगों से मेरी तुलना की जा रही है
    अपराध की यूनिवर्सिटी के चांसलर के पुत्र को मेरे समकक्ष तोला जा रहा है।

    1. आदरणीय महोदय, यहां पेश राजनीतिक विश्लेषण में पूज्य चाणक्य जी की तुलना कदापि किसी से नहीं की गई है। कम शब्दों में अधिक बात कहने के लिए ‘चाणक्य’ लिखा गया है। व्यापक अर्थों के साथ इसे महसूस करिए। रही बात बाहुबली हरिशंकर तिवारी की, तो जेल से जीतकर सेवा का लंबा सफर। कई बार मंत्री…राजीव जी, अटल जी सहित तमाम लोगों के साथ बतौर माननीय काम करने का गौरव। आरोप तमाम हैं पर वो अपने दौर के ‘चाणक्य’ रहे हैं। सरकार किसी की रही, पर वो मंत्री बनते रहे। ‘चाणक्य’ पर शेष अगले विष्लेषण में…पढ़ते रहिए ‘नमस्कार भारत’।
      धन्यवाद
      सादर

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