‘माता’ के आशीष से दौड़ेगी साइकिल, हाथी को विजय पथ पर ले चलेंगे ‘गणेश’

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  • भगवा खेमा मौजूदा तो सपा को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के जरिये ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कर रही कोशिश
  • बसपा को राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के साथ उच्च सदन के पूर्व सभापति के सहारे फिर सोशल pइंजीनियरिंग की सफलता की चाह

लखनऊ : सोशल इंजीनियरिंग के जिस फार्मूले के जरिये भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी करके 2007 में सूबे में बसपा की सरकार आई थी, एक बार फिर उसी समीकरण को साधकर उसकी कोशिश सत्ता में वापसी की है। ‘बहनजी’ के बाद सीएम की कुर्सी से फिसले ‘भैया’ की मंशा भी कुछ ऐसी ही है। दोनों ही दल इस फार्मूले को जीत का मंत्र मान रहे हैं और इसे सिद्ध करने के लिए इन दिनों पूरे प्रदेश में अभियान रूपी अनुष्ठान छेड़ रखा है। उधर, भगवा खेमा भी इसे लेकर सजग है। ‘माता’ के आशीष से विधानसभा में साइकिल दौड़ाने को बेकरार अखिलेश और मायावती की फिर से ताजपोशी की खातिर सतीश चंद्र मिश्रा के साथ हाथी के महावत बने ‘गणेश’ की राह रोकने के लिए भाजपा भी ‘हृदय’ संग जुट गई है।

बीते साढ़े 4 वर्षों की कुछ घटनाओं को लेकर विपक्ष भाजपा पर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगा रहा है। इसके चलते माना जा रहा है कि ब्राह्मण वर्ग में सत्ता पक्ष के प्रति कुछ असंतोष पल रहा है। विपक्ष इसे भुनाने की कोशिश में है तो सत्ताधारी दल अपने परंपरागत वोट बैंक को बचाने की जुगत में जुटा दिख रहा है। भगवा खेमा मौजूदा तो सपा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के जरिये ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने इसी कड़ी में शनिवार को उन्नाव के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में हिस्सा लिया। इन दिनों वरिष्ठ सपा नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय भी ऐसे ही आयोजनों में व्यस्त हैं। सदन में ऐसे ही एक उच्च पद पर आसीन रहा चेहरा गणेश शंकर पांडेय के रूप में बसपा के पास भी है, जिसका वह इन दिनों पूरी तरह से इस्तेमाल कर रही है। विधान परिषद के पूर्व सभापति के तौर पर प्रदेश भर में पहचाना जाने वाला यह नाम, अपने मामा पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के कारण मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर में भी अच्छी खासी राजनीतिक दखल रखता है।

मौजूदा सरकार में सजातीय बंधुओं के उत्पीड़न की बात कहकर पूर्वांचल के ये दोनों कद्दावर नेता अपने अपने दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सीएम की कुर्सी पर बैठाने के लिए लगातार भाजपा पर हमलावर हैं। वहीं, सत्तापक्ष से हृदय नारायण दीक्षित जातिवाद, परिवारवाद, भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण के आरोपों के बाण चलाकर भाजपा के परंपरागत वोट बैंक पर लगातार जारी विपक्ष के हमले का जवाब देने में जुटे हैं। विधानसभा के रण के केंद्र में आए ब्राह्मण को एक तरफ राम मंदिर रूपी राष्ट्र मंदिर और विकास दिखाया जा रहा है तो दूसरी तरफ से योगीराज में पंडितों पर हुए कथित अत्याचार गिनाए जा रहे हैं। तीन बार विधायक रहे नृपेंद्र मिश्रा की हत्या के वक्त भी उतना सियासी शोर नहीं उठा था जितना कि अब। बिकरू कांड में साल भर से जेल में बंद अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे सहित 4 महिलाओं की कैद को विपक्ष लगातार मुद्दा बनाने में लगा हुआ है। सूबे की सियासत में एंट्री लेने वाली आम आदमी पार्टी भी इसमें पीछे नहीं है। हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय को प्रबुद्ध वर्ग का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर आप भी ब्राह्मण वोटों पर अपनी दावेदारी ठोक रही है। देखना रोचक होगा कि विपक्ष के हमलों से भाजपा का किला दरकता है या इसे बचाने में हृदय संग जुटी भाजपा मोदी-योगी मैजिक चलाने में एक बार फिर कामयाब होती है।

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