(बात बीते कल की) बाबा ने मेरे लिए यह घड़ी…

बाबा ने मेरे लिए यह घड़ी खरीद दी थी लगभग साढ़े तीन दशक पहले. भला तब घड़ी की क्या जरूरत थी! अब मेरे ही पुत्र के उठने का कोई टाइम नहीं है. लेकिन तब एक सुबह उठकर मैं सीढ़ियों पर बैठे ऊंघ रहा था कि पीटीआई योगेन्द्र सिंह किसी काम से आ गए. कुछ खुढ़ुर-बुढ़ुर […]

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